वो डाली गई लकीरों अर्थात अक्षरों को सब लोग बड़ी प्रीति से अपने नेत्रों के पास रखते हैं, अर्थात पढ़ते हैं, और जिस कागज पर यह लेखनी चिह्न कर दे अर्थात लिख दे, उस कागज को लोग हाथों में लिए फिरते हैं. ''कलम गोयद की मन शाहे-जहानम कलमकश र बदौलत में रसानम...'' अर्थात लेखनी कहती है की मैं जगत की अधिष्ठात्री हूँ और लेखक को कुबेर भंडारी बना देती हूँ. इस लेखनी में जान नहीं है, परन्तु हमारे जैसे जानदारों(प्राणियों) बीसियों बार उत्पन्न कर सकती है.. हाँ मैं सदा शोकपरायण ह्रदय को नखों से छिलता रहता हूँ. अर्थात शोकों को ह्रदय से बहार करते रहता हूँ, ताकि अपने स्वरुप के विचार से अतिरिक्त विचारों को ह्रदय से बहार निकाल दूँ. 'दिल के आईने में है तस्वीर-यार. जब जरा गर्दन झुकाई देख ली..
कवि बनने के लिए.... ''शक्तिलोकशास्त्र काव्याद्दय्वेक्षनाते . काव्ययग्य शिक्ष्यभ्यास इति हेतुस्तुदुभवे''
MAERI PRAKASHIT PUSTAK- 1 PATHIKPARISPANDAN, 2 PATHIKPARIMILAN, 3 RAGINI, 4 MADHWI, 5 GIRDHAR PANDIT, 7 CHUTKI.